फाइर्स डे पर विशेष~ हर मुकाम पर मिला पिता का साथ

रवि हसिजा
शहर की युवा पीढ़ी पर वेलेंटाइन व फ्रेंडशिप डे का जादू भले ही हर वर्ष सिर चढ़कर बोलता हो मगर युवा पीढ़ी फादर्स डे से अंजान है। फादर्स डे को लेकर शहर के गिफ्ट सेंटर भी खामोश हैं। युवाओं के मूड को देखते हुए अधिकांश गिफ्ट सेंटरों पर फादर्स डे के लिए निर्धारित गिफ्ट भी नहीं हैं। अपने जीवन में मुकाम हासिल करने वाले जिले के सेलिब्रिटी अपने पिता को आदर्श के रूप में मानते हैं, जिनका हाथ पकड़कर वह आगे बढ़ सके।
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पिता के सहयोग ने पहुंचाया मुकाम पर
माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले जिले के प्रथम युवा कपिल रूहिल का कहना है कि पिता रणबीर की बदौलत की वह आज इस मुकाम पर पहुंचा है कि माउंट एवरेस्ट की ऊंची चोटी उसने फतह की है। माउंट एवरेस्ट फतह करना उसका बचपन का सपना था। यह सपना उसने अपने पिता को बताया तो उन्होंने उसका हौसला बढ़ाया और उस पर लगने वाली लगभग 22 लाख रुपये की जरूरत थी, जिसे उन्होंने इधर-उधर से पूरा करके दिया। यही नहीं बचपन से उसके पिता उसे खिलाड़ी बनाना चाहते थे। इसी के चलते उसे आठ साल की उम्र में निडानी हास्टल में डाल दिया गया। यहां उसने कबड्डी की ट्रेनिंग दिलाई। इसकी बदौलत वह कई बार नेशनल खेला और स्वर्ण पदक भी जीता। वह अपने पिता के सपने को भी साथ में पूरा कर रहा है। कपिल का कहना है कि पिता से उसे हमेशा प्यास व दुलार मिला है। यही नहीं हर मोड़ पर पिता रणबीर ने उसका साथ दिया है।
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पिता ने नहीं समझा बेटों से कम
रियेलिटी शो सरवाइवर इंडिया जीतने के बाद चर्चा में आई जींद के सफाखेड़ी गांव निवासी राजरानी का कहना है कि उसके पिता बारूराम ने उसे कभी लड़कों से कम नहीं समझा। बचपन से उसकी हर इच्छा पूरी की और उसे आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। उसके पिता किसान है और गांव में लड़कियों को आगे बढऩे के लिए प्रेरित करने वाले बहुत कम होते हैं, लेकिन उसके विपरीत उसके पिता ने उसे आगे ही नहीं बढ़ाया बल्कि हॉकी खेलने के लिए उसका हौसला बढ़ाया। राजरानी ने बताया कि जब भी वह किसी टूर्नामेंट में खेलने जाती थी तो पैसों की जरूरत पड़ती थी। परिवार के सामने दिए गए पैसों के अलावा भी वह अलग से उसे कुछ पैसे देते थे ताकि रास्ते में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। यही नहीं जब भी हॉकी का कोई समाचार टीवी पर देखते थे तो तुरंत फोन करके उसकी टीम के बारे में पूछते। चंडीगढ़ साईं में छोडऩे भी वह स्वयं आए और उसका हौसला बढ़ाया। राजरानी ने बताया कि उसके पिता ने कभी किसी बच्चों को गिफ्ट नहीं दिया, लेकिन जब वह आठवीं में थी और उसकी परीक्षाएं थी तो हिसार गए उसके पिता वहां से उसके लिए एक बढिय़ा पैन खरीदकर लाए ताकि वह अच्छी तरह परीक्षाएं दे सके। यह देखकर उसकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे, क्योंकि पहली बार किसी को गिफ्ट मिला था। अपने पिता की बदौलत ही वह पहले हॉकी खिलाड़ी बनी और अब सरवाइवर इंडिया जैसे शो में भाग लेकर उसे जीत सकी हैं।

Comments

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