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Sunday, June 17, 2012

धान की सीधी बिजाई से चार हजार रुपये तक प्रति एकड़ खर्च होगा कम

जींद : धान उत्पादक किसानों के लिए अच्छी खबर है। किसान अपने खेत में धान की सीधी बिजाई कर 3500 से 4000 रुपये तक प्रति एकड़ खर्च को कम कर सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने जिला के धान पैदा करने वाले किसानों को सलाह दी है कि वे वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए तरीकों व तकनीकों को अपनाएं और कम खर्च से धान की अच्छी पैदावार लें।
बिना पौध रोपण किए खेत में बीज द्वारा फसल की बिजाई करना धान की सीधी बिजाई कहलाती है। सीधी बिजाई की दो विधियां है। पहली विधि में खेत को तैयार करके सिंचाई की जाती है और बत्तर आने पर बिजाई सीड फर्टिलाइजर मशीन से धान के बीज की बिजाई की जाती है। दूसरी विधि में सूखे खेत को तैयार करके ड्रिल मशीन द्वारा धान के बीज की सीधी बीजाई कर दी जाती है। बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई की जाती है और बीज के अंकुरित होने तक खेत को गीला रखना जरूरी है।
इस विधि से धान की बिजाई करने से पौधो का फुटाव भी पौध से लगाई गई फसल के बराबर रहता है और पौध से धान की फसल रोपाई के लिए नर्सरी तैयार करने, खेत तैयार करने इत्यादि खर्चे की बचत हो जाती है। इतना ही नहीं धान की सीधी बिजाई से किसान 30 से 35 प्रतिशत पानी की बचत भी करता है। इधर कम खर्च में धान की अधिक पैदावार लेने के लिए कृषि विभाग द्वारा कवायद शुरू कर दी गई है।
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दो वर्ष से कर रहे सीधी धान की बिजाई
जलालपुर कलां गांव के रोहताश व नरेश तथा ईक्कस गांव के गोपीराम नामक किसान पिछले दो वर्षों से अपने खेत में सीधी धान की बिजाई कर रहे है। इस किसानों के खेतों पर कृषि विभाग की टीम लगातार भ्रमण कर रही है। वहीं राजपुरा गांव के राजेंद्र नामक किसान के खेत में धान की फसल की सीधी बिजाई मशीन से की गई।
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क्या कहते हैं कृषि अधिकारी
उपमण्डल कृषि अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मलिक, खंड कृषि अधिकारी डॉ. जेपी शर्मा, कृषि अधिकारी कमल सैनी, डॉ. राजेंद्र शर्मा की टीम ने किसान के खेत पर धान की सीधी बिजाई कराई। डॉ. सुरेन्द्र ने बताया कि इस विधि से कम खर्च में धान की अच्छी पैदावार ली जा सकती है। इस बिजाई विधि से पौधो में फुटाव भी अच्छा रहता है। कृषि विकास अधिकारी डॉ. कमल सैनी ने बताया कि 10 से 30 जून तक का समय धान की सीधी बिजाई के लिए उत्तम है। बासमती समूह के लिए 8-10 किलो तथा गैर बासमती समूह के लिए 10-12 किलो प्रति एकड़ बीज डाला जाना चाहिए। कृषि विकास अधिकारी डॉ. राजेंद्र शर्मा ने कहा कि सीधी बिजाई की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है।
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वर्जन
धान की सीधी बिजाई से किसानों को प्रति एकड़ चार हजार रुपये तक फायदा होता है। किसानों को कम खर्च करना पड़ता है। जिले के किसानों का इस तरफ रुझान बढ़ रहा है।
डॉ. रामप्रताप सिहाग, कृषि उप निदेशक

बसों की कमी से जूझ रहे लोग

जींद : हरियाणा रोडवेज जींद डिपो में बसों की कमी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। निर्धारित बेड़े से लगभग 60 बसें कम विभाग के पास हैं और आने वाले दिनों में यह समस्या ओर ज्यादा बढऩे वाली है, क्योंकि लगभग 20 बसें कंडम घोषित हो जाएंगी। उसके बाद मात्र 140 के आसपास बसों से ही परिवहन सेवा संचालित करनी होगी। फिलहाल नई बसों के आने की संभावना नहीं दिख रही है।
काबिल-ए-गौर है कि जींद डिपो बेड़े में नियमों के अनुसार 176 बसें होनी चाहिए जबकि बेड़े की 139 बसें ही ऑन रूट रहती हैं। इस समय रोडवेज के पास 25 से अधिक बसों की कमी चल रही है। इस कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहीं नहीं पिछले दिनों भी रोडवेज विभाग ने कम रिसीप्ट देने वाली कुछ बसों के रूट भी बंद करके अन्य रूटों पर चलाया था।
आने वाले दिनों में जिले के लोगों की समस्या बढऩे की संभावना है, क्योंकि आठ साल पूरे होने तथा सरकार द्वारा निर्धारित दस से बारह लाख किलोमीटर का सफर पूरा करने वाली 20 बसों को कंडम घोषित कर दिया जाएगा। 20 बसों के बेड़े से हट जाने के कारण यात्रियों तथा डिपो प्रबंधन को और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। डिपो के पास इतनी बसों का ही स्टाफ है। कुछ समय पहले डिपो में 35 बसें नई आई थी, जिससे यात्रियों को भी काफी राहत मिली थी और डिपो की आमदनी भी बढ़ी थी।
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रोडवेज को भी होगा आर्थिक नुकसान
रोडवेज बसों की कमी के चलते विभाग को भी आर्थिक नुकसान होगा और राजस्व में कमी होगी। बताया जा रहा है कि जून माह के अंत में जींद रोडवेज बेड़े से 20 बसें हटने जा रही हैं, जिनको विभाग द्वारा कंडम घोषित किया जा रहा है। इन बसों को कंडम घोषित करने के सभी प्रकार की औपचारिकताएं विभाग द्वारा पूरी कर ली गई हैं। बसों की संख्या कम होने से जींद डिपो को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। सूत्रों की माने तो बेड़े में बसों की संख्या कम होने पर कुछ बसों के रूट भी बंद किए जा सकते हैं।
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वर्जन
जून माह के अंत में जींद बेड़े से बीस बसों को कंडम घोषित किया जाएगा। बसों के कंडम घोषित होने के बाद डिपो में बसों की संख्या 139 रह जाएगी जबकि नियमों के अनुसार डिपो में 176 बसें होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जितने बसें डिपो में उनसे ही काम चलाया जाएगा और। यात्रियों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
खूबीराम कौशल, महाप्रबंधक, रोडवेज

आतंकी गतिविधियों पर नजर रखेगा स्पाई रोबोट

जींद : आतंकियों पर नजर रखने का काम अब स्पाई रोबोट करेगा। यह रोबोट में एक कैमरा लगा हुआ है जो अपने आसपास होने वाली गतिविधियों को रिकार्ड करेगा। यह स्पाई रोबोट मोबाइल के जरिये दुनिया के किसी भी कोने से संचालित किया जा सकता है। इस स्पाई रोबोट को बनाया है जींद इंजीनियरिंग कॉलेज के इलेक्ट्रानिक्स और कम्यूनिकेशन के फाइनल वर्ष के छात्रों अनिल, दीपक, प्रवेश, निर्मल, सविता और अंजलि ने। उन्होंने इस रोबोट का निर्माण कॉलेज की प्रोजेक्ट लैब में किया। इसे मोबाइल के जरिये दुनिया के किसी भी कोने से संचालित किया जा सकता है। इस रोबोट में एक वीडियो कैमरा भी लगा है, जिससे यह आसपास की तस्वीर लेकर भेज सकता है। इस टेक्नालाजी का उपयोग आतंकवादी निरोधक दस्ते में भी किया जा सकता है। जहां पर मानव का संकट हो, वहां पर यह रोबोट आसनी से जा सकता है। डिफेंस में भी इस रोबोट से महत्वपूर्ण कार्य किए जा सकते हैं। छात्रों ने बताया कि इसको टेस्ट करने के लिए सभी इंस्टूमेंट लैब उपलब्ध हैं। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय विभाग की फैकल्टी को दिया, जिनके मार्गदर्शन पर उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पूरा किया। इस उपलब्धि पर कॉलेज के चेयरमैन अनिल बंसल ने छात्रों के ग्रुप को बधाई दी और आगे भी इस प्रकार के प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए प्रेरित किया।

फाइर्स डे पर विशेष~ हर मुकाम पर मिला पिता का साथ

रवि हसिजा
शहर की युवा पीढ़ी पर वेलेंटाइन व फ्रेंडशिप डे का जादू भले ही हर वर्ष सिर चढ़कर बोलता हो मगर युवा पीढ़ी फादर्स डे से अंजान है। फादर्स डे को लेकर शहर के गिफ्ट सेंटर भी खामोश हैं। युवाओं के मूड को देखते हुए अधिकांश गिफ्ट सेंटरों पर फादर्स डे के लिए निर्धारित गिफ्ट भी नहीं हैं। अपने जीवन में मुकाम हासिल करने वाले जिले के सेलिब्रिटी अपने पिता को आदर्श के रूप में मानते हैं, जिनका हाथ पकड़कर वह आगे बढ़ सके।
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पिता के सहयोग ने पहुंचाया मुकाम पर
माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले जिले के प्रथम युवा कपिल रूहिल का कहना है कि पिता रणबीर की बदौलत की वह आज इस मुकाम पर पहुंचा है कि माउंट एवरेस्ट की ऊंची चोटी उसने फतह की है। माउंट एवरेस्ट फतह करना उसका बचपन का सपना था। यह सपना उसने अपने पिता को बताया तो उन्होंने उसका हौसला बढ़ाया और उस पर लगने वाली लगभग 22 लाख रुपये की जरूरत थी, जिसे उन्होंने इधर-उधर से पूरा करके दिया। यही नहीं बचपन से उसके पिता उसे खिलाड़ी बनाना चाहते थे। इसी के चलते उसे आठ साल की उम्र में निडानी हास्टल में डाल दिया गया। यहां उसने कबड्डी की ट्रेनिंग दिलाई। इसकी बदौलत वह कई बार नेशनल खेला और स्वर्ण पदक भी जीता। वह अपने पिता के सपने को भी साथ में पूरा कर रहा है। कपिल का कहना है कि पिता से उसे हमेशा प्यास व दुलार मिला है। यही नहीं हर मोड़ पर पिता रणबीर ने उसका साथ दिया है।
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पिता ने नहीं समझा बेटों से कम
रियेलिटी शो सरवाइवर इंडिया जीतने के बाद चर्चा में आई जींद के सफाखेड़ी गांव निवासी राजरानी का कहना है कि उसके पिता बारूराम ने उसे कभी लड़कों से कम नहीं समझा। बचपन से उसकी हर इच्छा पूरी की और उसे आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। उसके पिता किसान है और गांव में लड़कियों को आगे बढऩे के लिए प्रेरित करने वाले बहुत कम होते हैं, लेकिन उसके विपरीत उसके पिता ने उसे आगे ही नहीं बढ़ाया बल्कि हॉकी खेलने के लिए उसका हौसला बढ़ाया। राजरानी ने बताया कि जब भी वह किसी टूर्नामेंट में खेलने जाती थी तो पैसों की जरूरत पड़ती थी। परिवार के सामने दिए गए पैसों के अलावा भी वह अलग से उसे कुछ पैसे देते थे ताकि रास्ते में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। यही नहीं जब भी हॉकी का कोई समाचार टीवी पर देखते थे तो तुरंत फोन करके उसकी टीम के बारे में पूछते। चंडीगढ़ साईं में छोडऩे भी वह स्वयं आए और उसका हौसला बढ़ाया। राजरानी ने बताया कि उसके पिता ने कभी किसी बच्चों को गिफ्ट नहीं दिया, लेकिन जब वह आठवीं में थी और उसकी परीक्षाएं थी तो हिसार गए उसके पिता वहां से उसके लिए एक बढिय़ा पैन खरीदकर लाए ताकि वह अच्छी तरह परीक्षाएं दे सके। यह देखकर उसकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे, क्योंकि पहली बार किसी को गिफ्ट मिला था। अपने पिता की बदौलत ही वह पहले हॉकी खिलाड़ी बनी और अब सरवाइवर इंडिया जैसे शो में भाग लेकर उसे जीत सकी हैं।

शिक्षा के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर नहीं रहेंगे विद्यार्थी

रवि हसिजा
अब जिले के विद्यार्थियों को बेहतर कोर्स करने के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नए शिक्षा सत्र से रोहतक रोड पर स्थित कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रीजनल सेंटर में कई नए कोर्स शुरू होंगे। इसका जिले के अलावा आसपास जिलों के कई विद्यार्थियों को फायदा मिलेगा। नए शिक्षा सत्र से नए कोर्स शुरू करने को लेकर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने तैयारियां भी शुरू कर दी है।
काबिल-ए-जिक्र है कि जींद में रीजनल सेंटर की घोषणा मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने की थी। इसके बाद किराये के भवनों में रीजनल सेंटर की कक्षाएं लगनी शुरू हुई थी। इसके बाद रोहतक रोड स्थित हमेटी संस्थान के खाली कमरों में रीजनल सेंटर में एमबीए तथा एमसीए विषयों की कक्षाएं चल रही है, लेकिन अब कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रशासन ने रीजनल सेंटर में अन्य कोर्सों को शुरू करने का मन बना लिया है। इन कोर्सों को शुरू करने के लिए मई माह में वाइस चांसलर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसमें रीजनल सेंटर के निदेशक उमेद सिंह ने भी भाग लिया था। बैठक में इन कोर्सों को शुरू करने पर विचार किया गया था। गत तीन जून को जींद में आयोजित हुई विकास रैली में मुख्यमंत्री ने इन कोर्सों को नए शिक्षा सत्र से शुरू करने की घोषणा भी थी।
इसके तहत कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रीजनल सेंटर में शैक्षणिक सत्र 2012-13 के लिए एमए एजूकेशन, एमए मास कम्युनिकेशन, टूरिज्म एवं मैनेजमेंट, एमए संगीत, पोस्ट ग्रेजुएट फिजिकल एजूकेशन, अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में फिजिकल एजूकेशन, होम साइंस की कक्षाएं प्रारंभ होंगी। फिलहाल इनकी कक्षाएं आबकारी एवं कराधान भवन में लगाने पर विश्वविद्यालय तथा जिला प्रशासन सोच-विचार कर रहा है।
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बिल्डिंग की दिक्कत आ रही आड़े
रीजनल सेंटर की घोषणा हुई सालों बीत चुके हैं, लेकिन आज तक इसकी बिल्डिंग बनकर तैयार नहीं हुई है। किराये के भवनों में ही आज तक रीजनल सेंटर चल रहा है। पिछले दिनों रीजनल सेंटर की बिल्डिंग निर्माण का काम शुरू हुआ था, लेकिन फिर से ढील बरती जा रही है। नतीजा अब तक कोई ब्लाक इत्यादि बनकर तैयार नहीं हो सका है। फिलहाल रैली के माध्यम से भी मुख्यमंत्री ने बिल्डिंग निर्माण में तेजी लाने की बात कही थी।
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वर्जन
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के वाइस चांसलर द्वारा मई माह में मीटिंग ली गई थी, जिसमें रीजनल सेंटर में कई नए कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया गया था।
उमेद सिंह, निदेशक, रीजनल सेंटर, जींद

प्रधानमंत्री कार्यालय को नहीं पता महात्मा गांधी को किसने दिया महात्मा व राष्टï्रपिता का दर्जा

रवि हसिजा
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को महात्मा तथा राष्टï्रपिता का दर्जा किसने और कब दिया? देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को चाचा का दर्जा किसने और कब दिया? यह सवाल अमूमन हमारे दिमाग में आ जाते हैं, लेकिन देश के प्रधानमंत्री कार्यालय को भी इनकी जानकारी नहीं है कि आखिर यह नाम किसने और कब दिए। सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जब नामों को किसने व कब दिए जाने बारे जानकारी मांगी गई तो प्रधानमंत्री कार्यालय ने समक्ष किया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। प्रधानमंत्री कार्यालय भी आरटीआइ के तहत मांगी गई पूरी सूचना न दे पाए तो फिर आम विभाग से क्या उम्मीद लगाई जा सकती है। अखिल भारतीय अग्रवाल समाज हरियाणा के अध्यक्ष राजकुमार गोयल ने प्रधानमंत्री कार्यालय से आरटीआइ के तहत सात अप्रैल 2012 यह सूचना मांगी थी कि भारत सरकार के रिकार्ड के अनुसार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का दर्जा किसने और कब दिया?, भारत सरकार के रिकार्ड के अनुसार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को महात्मा का दर्जा किसने और कब दिया? देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को चाचा का दर्जा किसने और कब दिया? देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री देवी लाल को ताऊ का दर्जा किसने और कब दिया? देश का वैश्य समाज विभिन्न कार्यक्रमों में यह दर्शाता है कि महात्मा गांधी वैश्य समाज के थे, क्या यह सही है?, ये सूचनाएं प्रधानमंत्री कार्यालय से मांगी गई, जिसके जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय ने 13 अप्रैल 2012 को यह कहकर सूचना के अधिकार को ठेंगा दिखाने की कोशिश की ये सूचनाएं इस कार्यालय में संधारित अभिलेख की विषय वस्तु नहीं है। जब राजकुमार गोयल को प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा यह सूचना प्रेषित की गई तो राजकुमार गोयल ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 19 के तहत 23 अप्रैल 2012 को अपील की। प्रधानमंत्री कार्यालय के केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी को की गई अपील में राजकुमार गोयल ने लिखा कि उन्हें मांगी गई सभी सूचनाओं की जानकारी उपलब्ध करवाएं। यदि यह सूचना प्रधानमंत्री कार्यालय में संधारित अभिलेख की विषय वस्तु नहीं है तो यह सूचित करने की कृपा करे कि यह सूचना कौन सा विभाग देगा। इस अपील के जवाब में 21 मई 2012 को निदेशक एवं अपील प्राधिकारी द्वारा यह सूचना प्रेषित की गई कि आप द्वारा मांगी गई सूचनाएं इस कार्यालय में संधारित अभिलेख की विषय वस्तु नहीं है और जहां तक अन्य विभाग का प्रश्न है तो उनके पास ऐसे किसी भी मंत्रालय या विभाग की जानकारी नहीं है, जिसके पास आप द्वारा चाही गई सूचना उपलब्ध हो सकती है, इसलिए आवेदन पत्र अन्य विभाग को अतंरित किया जाना संभव नहीं। गोयल का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा सूचना का सही जवाब नहीं दिया गया। या तो प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा यह लिखा जाना चाहिए था कि उनके पास ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है। प्रधानमंत्री कार्यालय एक तरफ तो यह कह रहा है कि ये सूचनाएं इस कार्यालय में संधारित अभिलेख की विषय वस्तु नहीं है, साथ ही यह भी कह रहा है कि उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि यह सूचना कौन सा विभाग देगा। प्रधानमंत्री कार्यालय अपना पल्ला झाड़ रहा है।